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कृषि मशीनरी

फसल की कटाई के आधुनिक यंत्र

फसल की कटाई के आधुनिक यंत्र

जैसे जैसे किसान की खेती की जोत छोटी होती जा रही है उसी तरह से आजकल नए नए कृषि यन्त्र भी बाजार में आ रहे हैं. अभी रबी की फसल खेतों में शान से लहलहा रही है, किसान अपनी फसल के रंग और आकार को देख कर ही फसल के उत्पादन का अंदाज लगा लेता है. 

अभी किसान की रबी की फसल की कटाई मार्च से शुरू हो जाएगी और जैसा की सभी की फसल की कटाई इसी समय होती है तो जाहिर सी बात है मजदूरों की कमी किसान को होती है. 

कहते हैं न कि "आवश्यकता अविष्कार कि जननी है" तो किसानों कि इसी आवश्यकता को पूरा करने के लिए हमारे कृषि वैज्ञानिक रात दिन मेहनत कर रहे हैं. 

जब किसान अपने पूरे खेत कि जुताई बुबाई बैलों से नहीं कर पाता था तो ट्रेक्टर आया और जब खेत में फसल की कटाई समय से नहीं हो रही थी तो उसके लिए फसल कटाई के लिए मशीन भी बाजार में आ गई. आज हम इन्हीं मशीनों के बारे में चर्चा करेंगें:

रीपर बाइंडर (Reaper Binder):

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रीपर बाइंडर मशीन इंजन द्वारा चलती है और इसको चलाना भी आसान होता है. इससे किसान कम डीजल खर्चा में ज्यादा काम कर सकता है तथा इससे उसको भूसा भी पूरा मिल जाता है तथा किसान को फसल को इकठ्ठा करने में भी दिक्कत नहीं होती है क्यों की इसको रीपर काटने के साथ साथ उसकी पूरै भी बना देती है. 

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इससे किसानों को मजदूरों की समस्या से कुछ हद तक छुटकारा मिल जाता है. आजकल खेती में कुशल मजदूरों की बहुत ही समस्या है. 

कई बार किसान की पाकी हुई फसल मजदूर न मिलने की वजह से काफी नुकसान होता है. इस नुकसान से बचने के लिए ये छोटी कटाई मशीन बहुत ही काम की मशीन है.

हाथ का रीपर:

हाथ से काटने वाला रीपर भी आता है लेकिन वो फसल के पूरै नहीं बनता है वो एक साइड में कटी हुई फसल को डालता जाता है. बाद में उसे मजदूरों की सहायता से पूरै बना दिया जाता है. 

कंबाइन हार्वेस्टर मशीन: यह मशीन बहुत महँगी होती है तथा ये बड़े किसानों के लिए उपयोगी है. छोटे किसान इसको किराये पर लेकर भी अपनी फसल की कटाई करा सकते हैं. 

इससे कम समय में ज्यादा काम किया जा सकता है. ये फसल को ज्यादा ऊपर से काटती है जिससे बाद में इसके तूरे से भूसा बनाया जा सकता है. 

इसमें किसान अपनी फसल को समय से लाकर बाजार में ले जा सकता है. इसमें कम समय में किसान की फसल भूसे से अलग हो जाती है. कंबाइन हार्वेस्टर मशीन की ज्यादा जानकारी के लिए यहाँ क्लिक करें.

स्ट्रा-रीपर (Straw Reaper) या भूसा बनाने वाली मशीन:

स्ट्रा-रीपर या आप कह सकते हैं की भूसा बनाने वाली मशीन छोटे और बड़े दोनों किसानों के लिए किसी वरदान से कम नहीं है. जो किसान कंबाइन हार्वेस्टर मशीन से खेत को भूसा न बनने की वजह से कटवाने से डरते थे अब वो भी कंबाइन हार्वेस्टर से अपनी फसल कटवाने लगे हैं. 

क्यों की अब स्ट्रा-रीपर से भूसा बनाना आसान हो गया है. चूँकि किसान पशु भी पालते हैं और इसके लिए उन्हें भूसा भी चाहिए. तो भूसा की जरूरत रखने वाले किसानों के लिये तो हाथ से फसल कटवाना मजबूरी भी थी लेकिन जो किसान पशु नहीं पालते हैं,  वो कंबाइन मशीन से फसल कटवाने के इच्छुक भी थे लेकिन वो परेशान भी भी कम नहीं थे. 

क्योंकि कम्बाइन मशीन 30 से 35 सेंटीमीटर ऊपर से ही गेहूं की बालियों को काटती है इसलिए मशीन से कटवाने पर अनाज के नुकसान होने का खतरा रहता है. कम्बाइन मशीन नीचे गिरी हुई बालियों को उठा नहीं पाती है. 

ऐसे में भूसा बनाने वाली मशीन लोगों के लिये वरदान साबित हो रही है. इससे फसल कटवाने पर किसानों कई प्रकार का फायदा होता है. 

पहली बात तो ये कि उन्हें गेहूं के दानों के साथ साथ भूसा भी मिल जाता है. इससे पशुओं के लिये चारे की समस्या खड़ी नहीं होती. 

दूसरा जो दाना मशीन से खेत में रह जाता है उसको ये मशीन उठा लेती है. जिसको की किसान अपने पशु के दाने के रूप में प्रयोग कर लेता है क्योंकि इसमें मिटटी आने की सम्भावना रहती है.

कटर थ्रेसर (Cutter Thresher):

अगर हम कटर थ्रेसर की बात करें तो इसने भी किसानों की जिंदगी बहुत आसान कर दी है. जब किसान हाथ से फसल कटवाते थे तो अनाज को अलग करने के लिए फसल की मिडाई करने के लिए बैल या ट्रेक्टर चला के अनाज को अलग किया जाता था. 

उसके बाद थ्रेसर से करने लगे. 40 क्विंटल अनाज निकालने में 15 घंटे का समय लग जाता था जो की एक बड़े किसान के लिए बहुत ही मेहनत का काम था. 

उसके बाद कटर थ्रेसर आया जो की बहुत ही जल्दी अनाज और भूसा अलग कर देता है. आज के समय में कटर थ्रेसर बहुत ही उपयोगी मशीनरी बनी हुई है। 

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चारा काटने की मशीन:

पशुपालन और खेती दोनों एक दूसरे के पूरक हैं. किसान खेती के साथ साथ पशु पालन भी करता है. खेती से उसके पशुओं का चारा भी आ जाता है और उसके लिए पैसे कमाने का दूसरा जरिया भी बन जाता है. 

पुराने समय में चारा काटने के लिए किसान को बहुत मेहनत करनी पड़ती थी. कम से कम 3  आदमी चारा काटने की मशीन को चलाने के लिए चाहिए होते थे. 

लेकिन अब किसान ने भी इसका समाधान ढूंढ लिया और आज एक ही आदमी 10 - 15 पशुओं का चारा काट देता है वो भी 10 से 15 मिनट में.

चारा काटने की मशीन कैसे काम करती है:

चारा काटने की मशीन को दो आदमी उसके चक्र को हत्था के द्वारा घुमाते हैं तथा एक उसमें चारा डालने का काम करता है. यह बहुत ही मेहनत वाला काम है. इसमें किसान को बहुत समय लगता था और मेहनत भी बहुत होती थी.

इंजन से चलाने वाली मशीन:

इस मशीन को इंजन या बिजली से भी चलाया जा सकता है. इससे सिर्फ एक आदमी की आवश्यकता होती है वही आदमी अकेला ४ आदमी के बराबर काम कर लेता है. 

नीचे दिए वीडियो में देखें अंत में  हम कह सकते हैं की "Technology is a great servant, but a bad master." मशीनीकरण को हम अपने भले के लिए प्रयोग करें तो अच्छा है अन्यथा इसके दुष्परिणाम भी हम को ही झेलने पड़ते हैं.

जैसे की खड़ी फसल को कटवाने के अपने फायदे है तो कुछ नुकसान भी हैं. अगर हम फसल के अवशेष का भूसा बनवा लेते हैं तो ये हमारे लिए लाभदायक है और अगर हम इसके अवशेषों को जलाते हैं तो ये प्रक्रिया हमारी बहुत ही उपजाऊ जमीन को भी बंजर बनाने में बहुत ज्यादा समय नहीं लेती है. 

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एक घंटे में होगी एक एकड़ गेहूं की कटाई, मशीन पर सरकार की भारी सब्सिडी

एक घंटे में होगी एक एकड़ गेहूं की कटाई, मशीन पर सरकार की भारी सब्सिडी

इस सीजन में किसानों को कटाई के लिए मशीने भी कम कीमतों पर दी जाती हैं. जिनकी मदद से गेहूं कटाई में काफी समय लगता है. गेहूं के अच्छे उत्पादन के लिए किसान भी काफी मेहनत करते हैं. 

हालांकि गेहूं की फसल पककर तैयार हो चुकी है. जिसके बाद जल्द कटाई का काम भी शुरू हो जाएगा. इसमें समय, मेहनत और लागत कम करने के लिए कृषि मशीनों का उपयोग किये जाने की सलाह दी जाती है. 

लेकिन मशीनों से कटाई और गहाई के के बाद अक्सर पराली की समस्या हो जाती है. कटाई के बाद निकली फूंस को जानवरों के चारे के लिए इस्तेमाल किया जाता है. देश के अलग अलग राज्य की सरकारें मशीनों को खरीदने के लिए सब्सिडी देती है. 

 राजस्थान के कोटा में कुछ दिन पहले कृषि मोहत्सव का आयोजन हुआ था. जिसमें ऐसी ही एक मशीनरी आकर्षण का केंद्र बनी हुई थी. इस मशीन का नाम रीपर ग्राइंडर था. 

इस मशीन की सबसे बड़ी खासियत यही है कि, ये मात्र एक घंटे में एक एकड़ गेहूं की फसल की कटाई कर सकती है. अगर किसान इस मशीन को खरीदता है, तो राज्य सरकार की तरफ से इसमें 50 फीसद तक सब्सिडी मिलती है.

रीपर ग्राइंडर के बारे में

इस मशीन से गेहूं की फसल काटने के लिए 5 से 10 मजदूरों की जरूरत पड़ सकती है. 10 एचपी के इंजन वाली मशीन की मदद से सिर्फ एक घंटे में एक एकड़ फसल की कटाई हो सकती है. 

रीपर ग्राइंडर की मदद से गेहूं के अलावा जौ, बाजरा, सरसों, धान की फसलों की कटाई कर सकते हैं. रीपर ग्राइंडर ना सिर्फ फसलों की कटाई करती है बल्कि, उपज को साइड में फैला देती है. 5 फीट तक की लंबी फसल की कटाई इस मशीन से की जा सकती है. एक घंटे चलाने के लिए इस मशीन में एक लीटर तेल लग जाता है. 

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सरकार की तरफ से मिलता है अनुदान

अगर किसान इस मशीन को खरीदना चाहते हैं, तो वो इसका कोई भी साइज़ चुन सकते हैं. जिसकी कीमत 50 हजार से लेकर 5 लाख रुपये तक हो सकती है. जिसके लिए सरकार की ओर से 50 फीसद तक सब्सिडी दे रही है. 

रीपर ग्राइंडर को खरीदने के लिए किसान को मशीन के डीलर से कोटेशन लेना पड़ेगा. जो अपने जिले के कृषि विभाग के ऑफिस में जमा करना होगा. इस मशीन को खरीदने के लिये कुछ जरूरी कागजों की जरूरत पड़ती है.

जिसमें आधार कार्ड की कॉपी, जमीन के कागज, बैंक की पासबुक की कॉपी शामिल है. इसके अलावा ई-मित्र सेंटर की मदद से ऑनलाइन आवेदन भी कर सकते हैं.

गेहूं कटाई के बाद खेत की जुताई के लिए आधुनिक कृषि यंत्र

गेहूं कटाई के बाद खेत की जुताई के लिए आधुनिक कृषि यंत्र

आधुनिकता के चलते भारतीय कृषि क्षेत्र में बैलों की जगह कई प्रकार के कृषि यंत्रो और मशीनों ने ले ली है। उपकरण खेती के बहुत सारे बड़े से बड़े कार्यों को आसान बनाते हैं। 

साथ ही, लागत को भी कम करने का कार्य करते हैं। बुवाई से लगाकर कटाई तक के कार्यों को सुगम बनाने में कृषि यंत्र अपनी अहम भूमिका निभाते हैं। बुवाई के लिए खेत को तैयार करने के लिए किसान ट्रैक्टर द्वारा रोटावेटर या कल्टीवेटरका इस्तेमाल करते हैं। 

ये उपकरण मिट्टी की उपरी परत की हल्की जुताई करते हैं, जिससे बुवाई करना काफी सरल हो जाता है। आइए जानते हैं जुताई के लिए कुछ महत्वपूर्ण और लाभदायक कृषि यंत्रों के बारे में। 

मोल्ड बोर्ड हल 

मोल्ड बोर्ड हल को किसानों के बीच मिट्टी पलट हल के नाम से भी जाना व पहचाना जाता है। मिट्टी की उर्वरा शक्ति को बनाये रखने के लिए जरूरी है कि इसे पलटा जाये। 

मिट्टी पलटने तथा खरपतवार को नीचे दबाने के लिए मोल्ड बोर्ड हल (Mould Board Plough) ज्यादा गहरी जुताई करते हैं। मिट्टी को भी पलटते हैं, जिससे सतह पर मौजूद खर-पतवार और अन्य फसल अवशेष बेहतर तरीके से दब जाते हैं। 

बतादें, कि 2 फाल वाले प्लाऊ को संचालित करने के लिए ट्रैक्टर की हॉर्स पावर 35 से 45 हॉर्स पॉवर होनी चाहिए। इस प्लाऊ की कार्य क्षमता 1.5 हेक्टेयर तक प्रति दिन होती है। 

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साथ ही, 3 फाल वाले प्लाऊ को चलाने के लिए ट्रैक्टर की हॉर्स पावर 40 से 50 एचपी होनी चाहिए। इस हल के साथ किसान 2 हेक्टेयर तक प्रति दिन कार्य कर सकते हैं। 

इस कृषि उपकरण का इस्तेमाल गर्मी के मौसम में खेत की गहरी जुताई के लिए, ढैचा/सनई आदि हरी खाद वाली फसल को मिट्टी में पलटकर मिलाने के लिए भी किया जाता है। 

डिस्क प्लाऊ

डिस्क प्लाऊ  (Disc Plough) भी एक मिट्टी पलटने वाला हल है और यह मोल्ड बोर्ड हल की अपेक्षा ज्यादा गहराई तक जुताई करने में सक्षम होता है। किसान इस यंत्र का इस्तेमाल भारी मृदा को पलटने के लिए करते हैं। इसमें आपको दो या तीन फाल देखने को मिल सकते हैं।

खेतों में ज्यादा खरपतवार और गहरे फसल अवशेष को काटने तथा पलटने में इस यंत्र का इस्तेमाल किया जाता है। ट्रैक्टर की क्षमता के अनुसार इस यंत्र से 40 से 50 सेंटीमीटर की गहराई तक जुताई की जा सकती है। इस कृषि यंत्र की कार्य क्षमता प्रतिदिन 1.5 से 2 हेक्टेयर है। 

चिसेल प्लाऊ 

चिसेल हल (Chisel Plough) बिना सतह वाली मृदा को अस्त व्यस्त किये और सतह पर मौजूद फसल अवशेषों को यथावत रखते हुए बहुत गहरी चीरे लगाई जा सकती हैं। इस यंत्र के साथ 1 मीटर की गहराई तक जुताई कर सकते हैं। 

ऐसा करने से स्थाई तौर पर सतह के नीचे की जल निकासी सुनिश्चित की जा सकती है। मिट्टी पलट हलों के मुकाबले में चिजेल हल के इस्तेमाल से मिट्टी की सतह पर किसी तरह का कार्य नहीं किया जाता है, जिससे हवा या पानी की वजह मिट्टी के कटाव को रोका जा सकता है। 

लेजर लैंड लेवलर 

खेत की जुताई और सिंचाई करने से जमीन असमतल हो जाती है, जिससे मृदा के पोषक तत्व का असामान्य वितरण और सिंचाई जल में वृद्धि जैसी दिक्कतें खड़ी होने लग जाती हैं। 

समय-समय पर खेत के समतलीकरण की आवश्यकता को सटीक और कम में वक्त में पूरा करने के लिये लेजर लैंड लेवलर (Laser Land Leveler) का इस्तेमाल किया जाता है। इस मशीन में लेजर किरणों की सहायता से पीछे लगे बकेट को काबू करके जमीन को एकसार किया जा सकता है। 

कल्टीवेटर(Cultivator) से खेती के लाभ और खास बातें

कल्टीवेटर(Cultivator) से खेती के लाभ और खास बातें

कल्टीवेटर(Cultivator) को वैसे तो साधारण कृषि यंत्र बताया जाता है लेकिन यदि हम पारंपरिक खेती के तौर-तरीकों को याद करें तो किसान भाइयों को इस बात का अहसास हो जायेगा कि यह कल्टीवेटर खेती-किसानी के लिए बहुत ही लाभकारी यंत्र है। 

किसान भाई जो काम हफ्तों में अपना पसीना बहाकर कर पाते थे वो काम कल्टीवेटर चंद घंटों में ही कर देता है। कल्टीवेटर से किसानों की जहां अनेक परेशानियां कम हुई हैं, वहीं खेती के उत्पादन में लाभ हुआ है और खेतों को बुवाई के लिए तैयार करना आसान हो गया है।

कल्टीवेटर(Cultivator) क्या है

खेती के आधुनिक तरीके आने के बाद खेती करने का स्वरूप ही बदल गया है और खेती करना अब बहुत आसान हो गया है। जब से बैलों की जगह ट्रैक्टर आ गये हैं तब से प्राचीन कृषि यंत्रों की जगह नये कृषि यंत्रों ने जगह ले ली है, इसमें कल्टीवेटर सबसे प्रमुख है। 

जो खेतों की जुताई बैलों व हल से की जाती थी, वो काम इस कल्टीवेटर से किये जाते हैं । साथ ही अनेक अन्य ऐसे काम भी किये जाते हैं जो पैदावार को बढ़ाने में सहायक हैं। 

कल्टीवेटर बैल को जोत कर भी चलाये जा सकते हैं और ट्रैक्टर के पीछे लगाकर खेत की जुताई की जा सकती है। यह कल्टीवेटर 6HP से लेकर 15HP तक आता है।

पशू चालित कल्टीवेटर(Cultivator):

पशु चालित कल्टीवेटर भी होता है। इस कल्टीवेटर को पशु बैल के पीछे जोत कर चलाया जा सकता है। किन्तु वर्तमान समय में ट्रैक्टर की लोकप्रियता के कारण पशुओं वाले कल्टीवेटर का चलन नहीं देखा जाता है।

ट्रैक्टर चालित कल्टीवेटर(Cultivator):

टैक्टर के पीछे हाइड्रोलिक के माध्यम से कल्टीवेटर चलाया जाता है। ये कल्टीवेटर जमीन की जरूरत के मुताबिक इस्तेमाल किये जाते हैं। कंकरीली जमीन के लिए अलग कल्टीवेटर होता है और सामान्य जमीन के लिए अलग कल्टीवेटर होता है। इसके साथ गहरी जुताई करने के लिए अलग कल्टीवेटर होता है और उथली जुताई के लिए अलग कल्टीवेटर होता है। 

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इनमें से प्रमुख कल्टीवेटर(Cultivator) इस प्रकार हैं:-

  1. स्प्रिंग युक्त कल्टीवेटर(Cultivator): पथरीली मिट्टी व या फसलों की ठूंठ वाले खेतों उपयोग किया जाता है। ट्रैक्टर से चलने वाले इस कल्टीवेटर में कई स्प्रिंग लगी होती है। स्प्रिंग की वजह से जुताई करते समय फार पर पड़ने वाले दबाव को कल्टीवेटर सहन कर लेता है और टाइन नहीं टूटने से बच जाता है। इस कारण यह कल्टीवेटर बिना किसी नुकसान के आसानी से मनचाही जुताई कर देता है।
  2. स्प्रिंग रहित कल्टीवेटर (रिजिड लाइन कल्टीवेटर): बिना स्प्रिंग वाले कल्टीवेटर का इस्तेमाल कंकरीली या पथरीली भूमि में नहीं किया जाता है। इसका प्रयोग साधारण भूमि में किया जाता है। इसमें टाइन मजबूती के साथ फ्रेंम से इस प्रकार से लगाये जाते हैं कि जुताई करते समय दबाव पड़ने पर ये टाइन अपने स्थान से हटे नहीं। इस कल्टीवेटर की एक और खास बात यह है कि टाइन की दूरी को अपने  हिसाब से दूर या पास किया जा सकता है। यह कल्टीवेटर खेत में खरपतवार को नियंत्रित करने में भी सहायक होता है।
  3. डक फुट कल्टीवेटर(Cultivator): इन दोनों कल्टीवेटरों की अपेक्षा डक फुट कल्टीवेटर हल्का होता है। इसका मुख्य रूप से इस्तेमाल उथली जुताई करने और खरपतवारों को नष्ट करने के लिए किया जाता है। इसकी बनावट बिना स्प्रिंग वाले कल्टीवेटर की तरह होती है। इसमें फारों की संख्या जरूरत और आवश्यकता के अनुसार कम या ज्यादा की जा सकती है। इसमें टाइन का आकार बत्तख के पैर जैसा होता है इसलिये इस कल्टीवेटर को डक फूट कल्टीवेटर कहा जाता है।

कल्टीवेटर(Cultivator) से जुताई के फायदे

कल्टीवेटर से अनेक तरह की जुताई की जा सकती है। सबसे पहले हम यह जानने की कोशिश करते हैं कि जुताई कितने प्रकार की होती है और कल्टीवेटर(Cultivator) किस जुताई में कितना मददगार साबित हो सकता है। 

खेत को तैयार करने के लिए हमें वि•िान्न प्रकार की जुताई करनी होती है । इसमें ग्रीष्म ऋतु की जुताई, गहरी जुताई, छिछली जुताई, अधिक समय तक जुताई, हराई या हलाई की जुताई की जाती है।

  1. कठोर जमीन को उपजाऊ बनाने के लिए गहरी जुताई की जाती है। इस काम में कल्टीवेटर(Cultivator) बहुत काम आता है। इस तरह से खेत की तैयारी गहरी जड़ों वाली फसलों के लिए की जाती है।
  2. इसी तरह जिन फसलों की जड़े अधिक गहराई में नहीं जातीं हैं उनके लिए छिछली जुताई की जाती है। उसमें भी कल्टीवेटर(Cultivator) काम में आता है।
  3. ग्रीष्म ऋतु में अधिक जुताई इसलिये की जाती है ताकि उस मिट्टी में मौजूद हानिकारक कीट और उनके अंडे नष्ट हो जाते हैं। इसके अलावा मृदा में अनेक रोग भी दूर हो जाते हैं। ग्रीष्म ऋतु में अधिक समयतक जुताई करने में कल्टीवेटर बहुत लाभकारी साबित होता है।
  4. एक फसल लिये जाने के बाद नई फसल की तैयारी के लिए कल्टीवेटर(Cultivator) बहुत काम आता है। पहले तो वह खेत की मिट्टी को ढीला करता है और फसल के अवशेष को खेत से बाहर करता है। उसे बुवाई के लिए तैयार करता है।
  5. बुवाई से पहले खेत में यदि नर्सरी लगाने की क्यारियां बनानी होतीं हैं तो कल्टीवेटर(Cultivator) उसमें कभी काम आता है।
  6. हैरों, पॉवर टिलर, रोटावेटर की अपेक्षा कल्टीवेटर सस्ता व हल्का होता है, जिससे कम एचपी वाले ट्रैक्टरों में लगाकर जुताई की जा सकती है।
  7. पारंपरिक तरीके से खेती करने वाले किसानों को कल्टीवेटर(Cultivator) से जुताई करने वा करवाने से पैसा और समय तो बचता ही है । साथ मजदूरों की समस्या से भी छुटकारा मिल जाता है।
  8. छिटकवां विधि से बोई गई बीजों की मिट्टी में एक समान रूप से मिलाने तथा ढकने के लिए इस यंत्र का प्रयोग किया जाता है।
  9. पंक्तियों में बोई फसलों में निराई-गुड़ाई का कार्य भी कल्टीवेटर(Cultivator) से किया जाता है।
  10. इसकी सहायता से फसल की जड़ो पर मिट्टी चढ़ाने का काय किया जा सकता ह।
  11. बुआई से पहले खेत में खाद को मिट्टी में मिलाने में भी कल्टीवेटर(Cultivator) काम करता है।

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कल्टीवेटर

कल्टीवेटर(Cultivator) से मिलने वाले खेती के अन्य लाभ

1.बुआई से पहले कल्टीवेटर के माध्यम से खरपतवार हटाने और गुड़ाई का काम किया जा सकता है। जो काम पहले मजदूर काफी समय में करते थे वो काम कल्टीवेटर अकेला ही चंद घंटों में कर देता है। इससे कृषि लागत में कमी आती है और किसान भाइयों को लाभ मिलता है। 

 2.फसल के बीच में निराई-गुड़ाई कल्टीवेटर(Cultivator) से किये जाने के लिए फसलों को कतार में बोया जाता है। इससे किसान भाइयों को यह लाभ होता है कि कतार में बीज बोने से बीज की बर्बादी नहीं होती है और फसल भी अधिक होती है।

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 3.कल्टीवेटर का प्रयोग मिट्टी की जुताई के लिये किया जाता है। इसके प्रयोग से खेत के खरपतवार व घास जड़ सहित उखड़ कर नष्ट हो जाती है या मिट्टी से अलग होकर जमीन के ऊपर आ जाती है जो बाद में सूर्य की गर्मी से सूख कर नष्ट हो जाती है।

कौन सी फसल के लिए कौन सा कल्टीवेटर(Cultivator) है उपयोगी

  1. स्प्रिंग युक्त कल्टीवेटर मुख्यत: दलहनी व जड़वाली सब्जियों की फसलों के लिए उपयोगी होता है। क्योंकि इससे गहरी जुताई की जा सकती है। स्प्रिंग युक्त कल्टीवेटर से गहरी जुताई से मूंग, मोठ, बरसीम, उड़द, सोयाबीन, मूंगफली, आलू, मूली, गाजर, शकरकद, चना आदि मे अधिक लाभ मिलता है।
  2. डक फुट कल्टीवेटर से उथली जुताई से गेहूं, जौ, ज्वार, जई, सरसों, आदि फसलों में अधिक लाभ मिलता है।

कृषि कार्यों को बनता है सुगम और तेल खपत करता है कम 49 HP वाले इस ट्रैक्टर में है दम

कृषि कार्यों को बनता है सुगम और तेल खपत करता है कम 49 HP वाले इस ट्रैक्टर में है दम

खेती किसानी को आसान बनाने के लिए ट्रैक्टर अपनी अहम भूमिका निभाता है। इसलिए ट्रैक्टर को किसान का मित्र कहा जाता है। अगर आप भी कम ईंधन खपत करने वाला शक्तिशाली ट्रैक्टर खरीदना चाहते हैं, तो आपके लिए महिंद्रा 585 डीआई एक्सपी प्लस ट्रैक्टर एक शानदार विकल्प सिद्ध हो सकता है। क्योंकि, इस Mahindra 585 DI XP PLUS Tractor ट्रैक्टर में 2100 आरपीएम के साथ 49 HP पावर उत्पन्न करने वाला 3054 सीसी इंजन उपलब्ध किया जाता है, जिसे फ्यूल एफिशिएंट टेक्नोलॉजी के साथ तैयार किया गया है। Mahindra 585 DI XP PLUS Tractor: महिंद्रा कंपनी भारत में अपनी बेहतरीन परफॉर्मेंस वाले ट्रैक्टरों के लिए किसानों के मध्य अलग ही पहचान बनाए हुए है। भारत के ज्यादातर किसान महिंद्रा ट्रैक्टर्स का ही उपयोग करना पंसद करते हैं। 

महिंद्रा 585 डीआई एक्सपी प्लस की विशेषताएं क्या-क्या हैं ?

Mahindra 585 DI XP PLUS ट्रैक्टर में आपको 3054 सीसी क्षमता वाला 4 सिलेंडर में ELS Water Cooled इंजन प्रदान किया जाता है, जो 49 HP पावर के साथ 198 NM अधिकतम टॉर्क उत्पन्न करता है। इस महिंद्रा ट्रैक्टर में 3 Stage Oil Bath Type Pre Air Cleaner टाइप एयर फिल्टर आता है। कंपनी के इस ट्रैक्टर के इंजन से 2100 आरपीएम उत्पन्न होता है। साथ ही, इसकी अधिकतम पीटीओ पावर 44.9 HP है। महिंद्रा 585 डीआई एक्सपी प्लस की भार उठाने की क्षमता 1800 किलोग्राम है। Mahindra 585 DI XP PLUS महिंद्रा ट्रैक्टर की फॉरवर्ड स्पीड 30.0 kmph रखी गई है। यह 11.9 km h रिवर्स स्पीड के साथ आता है। एक्सपी प्लस सीरीज वाले इस ट्रैक्टर में आपको 50 लीटर क्षमता वाला ईंधन टैंक प्रदान किया जाता है।   

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महिंद्रा 585 डीआई एक्सपी प्लस के फीचर्स क्या-क्या हैं ?

महिंद्रा के इस एक्सपी प्लस ट्रैक्टर में आपको Manual / Dual Acting Power स्टीयरिंग देखने को मिल जाता है। बतादें, कि इस 49HP ट्रैक्टर में 8 Forward + 2 Reverse गियर वाला गियरबॉक्स उपलब्ध किया गया है। कंपनी का यह ट्रैक्टर आपको Single / Dual (Optional) क्लच के साथ दिखने को मिल जाता है। साथ ही, इसमें Full Constant Mesh टाइप ट्रांसमिशन प्रदान किया गया है। Mahindra 585 DI XP PLUS महिंद्रा के इस एक्सपी प्सस ट्रैक्टर में Dry Disc / Oil Immersed ब्रेक्स प्रदान किए गए हैं। महिंद्रा कंपनी के इस ट्रैक्टर में MRPTO टाइप पावर टेकऑप आती है, जो 540 आरपीएम उत्पन्न करती है। महिंद्रा 585 डीआई एक्सपी प्लस एक 2WD यानी टू व्हील ड्राइव ट्रैक्टर है। बतादें, कि इसमें 7.50 x 16  फ्रंट टायर एवं 14.9 x 28 रियर टायर प्रदान किए गए हैं।

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महिंद्रा 585 डीआई एक्सपी प्लस की कितनी कीमत है

भारत में Mahindra & Mahindra ने अपने इस Mahindra 585 DI XP PLUS महिंद्रा 585 डीआई एक्सपी प्लस ट्रैक्टर की एक्स शोरूम कीमत 7.00 लाख से 7.30 लाख रुपये निर्धारित की गई है। 585 डीआई एक्सपी प्लस की ऑन रोड़ कीमत समस्त राज्यों में लगने वाले आरटीओ रजिस्ट्रेशन तथा रोड टैक्स की वजह से भिन्न हो सकती है। महिंद्रा 585 डीआई एक्सपी प्लस ट्रैक्टर के साथ कंपनी 6 वर्ष की वारंटी प्रदान करती है।
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केंद्रीय कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर के ट्वीट में छिपी है यह तारांकित खुशखबरी

ट्रैक्टर से जुड़ी है गुड न्यूज़, जानिये कब मिलेगी सौगात

भारत की केंद्रीय सरकार में केंद्रीय कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने अधिकृत ट्विटर हैंडल से कृषक हितैषी तारांकित खुशखबरी दी है। यूनियन एग्रीकल्चर मिनिस्टर (Union Agriculture Minister)
नरेंद्र सिंह तोमर (Narendra Singh Tomar) ने जुलाई मासांत, दिवस 31 जुलाई 2022 को दोपहर 1.24 बजे ट्वीट के जरिए किसान और किसानी के हित से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारी जारी की। केंद्रीय कृषि मंत्री तोमर ने अपने ट्वीट (Tweet) में मध्य प्रदेश के केंद्रीय कृषि मशीनरी प्रशिक्षण और परीक्षण संस्थान बुदनी (Central Farm Machinery Training & Testing Institute, Budni, Madhya Pradesh, INDIA/सीएफएमटीटीआई/CFMTTI), द्वारा लिए गए निर्णय के बारे में जानकारी दी। उन्होंने #आजादीकाअमृतमहोत्सव (#AzadiKaAmritMahotsav) एवं #आत्मनिर्भरकृषि (#AatmaNirbharKrishi) हैश टैग के साथ ट्रैक्टर से जुड़े बड़े फैसले के बारे में जानकारी दी।
आत्मनिर्भर कृषि ऐप्प (Atmanirbhar Krishi app) से सम्बंधित सरकारी प्रेस रिलीज़ दस्तावेज पढ़ने या पीडीऍफ़ डाउनलोड के लिए, यहां क्लिक करें
उन्होंने ट्वीट में सीएफएमटीटीआई बुदनी द्वारा खेती कार्य में प्रयुक्त होने वाले ट्रैक्टर्स की टेस्टिंग प्रोसेस यानी परीक्षण प्रक्रिया के लिए पूर्व में निर्धारित समय सीमा 9 माह को घटाकर 75 दिन करने के बारे में सूचना प्रदान की। अपने ट्वीट में केंद्रीय मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने एक पोस्टर शेयर किया है। इस पोस्टर में किसान, ट्रैक्टर के साथ स्वयं केंद्रीय मंत्री तोमर भी दृष्टव्य हैं। गौर करने वाली बात यह है कि यूनियन मिनिस्टर ऑफ स्टेट फॉर एग्रीकल्चर एंड फार्मर वेलफेयर नरेंद्र सिंह तोमर द्वारा साझा किए गए पोस्टर में तारांकित सूचना पर आपको जरा बारीकी से नजर डालनी होगी। दरअसल पोस्टर में ट्रैक्टर परीक्षण प्रक्रिया डेडलाइन कम करने, आजादी के अमृत महोत्सव आदि सभी को तो बड़े अक्षरों में प्रदर्शित किया गया है, लेकिन इस बात का खुलासा तारांकित चिह्न के साथ अपेक्षाकृत महीन अक्षरों में जाहिर किया गया है कि, प्रक्रियागत यह बदलाव कब से लागू होगा। इमेज को जूम कर गौर से पढ़ने पर पता चलता है कि, ट्रैक्टर परीक्षण प्रक्रिया 9 माह से घटाकर 75 दिन करने संबंधी प्रोसेस इस महीने 15 अगस्त से लागू होगी।


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इस लिंक में आप भी पढ़िये केंद्रीय मंत्री तोमर का ट्वीट एवं देखिए ट्वीट में साझा किए गए पोस्टर को। सौजन्य- ट्विटर: https://twitter.com/nstomar/status/1553650290603110400

ट्वीट पर प्रतिक्रिया

जैसा कि ट्विटर पर क्रिया की प्रतिक्रिया की प्रक्रिया की रवायत है, तो आपको बता दें इस सिलसिले में 31 जुलाई 2022 को दोपहर 1.24 बजे केंद्रीय मंत्री के सोशल मीडिया अकाउंट से जारी इस ट्वीट पर तीन शाब्दिक प्रतिक्रियाएं ही दर्ज हुईं, जिसमें से दो बधाई संबंधी हैं, तो एक में शिकायती भाव में किसान का दुखड़ा दर्ज है। हिसार, हरियाणा के एक यूजर ने रिप्लाई में बीमा योजना का लाभ अपात्रों को प्रदान करने एवं पात्र हितग्राहियों के वंचित रहने की परेशानी का जिक्र किया है, आप भी पढ़िये। सौजन्य- ट्विटर : https://twitter.com/yaarabmole/status/1553677560214863872?t=1ZUT0NhVtICm6cKYpKZTLw&s=19 वैसे ट्रैक्टर परीक्षण प्रक्रिया में लगने वाले समय को कम करने से क्या लाभ और परिणाम होंगे, इस बारे में आप अपने विचार हमारे साथ साझा करें।
रोटरी हार्वेस्टर मशीन पर 80 प्रतिशत सब्सिडी दे रही है ये राज्य सरकार, यहां करें आवेदन

रोटरी हार्वेस्टर मशीन पर 80 प्रतिशत सब्सिडी दे रही है ये राज्य सरकार, यहां करें आवेदन

रबी का सीजन प्रारंभ हो चुका है। ऐसे में खेतों की जुताई की जा रही है ताकि खेतों को बुवाई के लिए तैयार किया जा सके। बहुत सारे खेतों में अब भी पराली की समस्या बनी हुई है, जिसके कारण खेतों को पुनः तैयार करने में परेशानी आ रही है। खेतों से फसल अवशेषों को निपटाना बड़ा ही चुनौतीपूर्ण काम है, इसमें बहुत ज्यादा समय की बर्बादी होती है। अगर किसान एक बार पराली का प्रबंधन कर भी ले, तो इसके बाद भी खेत से बची-कुची ठूंठ को निकालने में भी किसान को कड़ी मेहनत करनी पड़ती है। लेकिन यदि आज की आधुनिक खेती की बात करें तो बाजार में ऐसी कई मशीनें मौजूद है जो इस समस्या का समाधान चुटकियों में कर देंगी। इन मशीनों के प्रयोग से अवशेष प्रबंधन के साथ-साथ खेतों की उर्वरा शक्ति में भी बढ़ोत्तरी होगी। ऐसी ही एक मशीन आजकल बाजार में आ रही है जिसे रोटरी हार्वेस्टर मशीन कहा जाता है। यह मशीन फसल के अवशेषों को नष्ट करके खेत में ही फैला देती है। यह मशीन किसानों के लिए बेहद उपयोगी साबित हो सकती है। इस मशीन के फायदों को देखते हुए बिहार सरकार ने मशीन की खरीद पर किसानों को 80 प्रतिशत तक की सब्सिडी देने के लिए कहा है।

क्या है रोटरी हार्वेस्टर मशीन

इस मशीन को रोटरी मल्चर भी कहा जाता है, यह मशीन बेहद आसानी से खेत में बचे हुए अनावश्यक अवशेषों को नष्ट करके खेत में फैला देती है, जिसके कारण खेत में पर्याप्त नमी बरकरार रहती है। इसके साथ ही खेत में फैले हुए अवशेष डीकंपोज होकर खाद में तब्दील हो जाते हैं। अवशेषों के प्रबंधन की बात करें तो यह मशीन खेत में उम्दा प्रदर्शन करती है।

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रोटरी हार्वेस्टर मशीन पर बिहार सरकार कितनी देती है सब्सिडी

अगर रोटरी हार्वेस्टर मशीन की बात करें तो उस मशीन पर बिहार सरकार किसानों को 75 से 80 प्रतिशत तक सब्सिडी प्रदान करती है। यह सब्सिडी बिहार का कृषि विभाग 'कृषि यंत्रीकरण योजना' के अंतर्गत किसानों को उपलब्ध करवाता है। बिहार सरकार के द्वारा जारी आदेश के अनुसार यदि बिहार का सामन्य वर्ग का किसान रोटरी हार्वेस्टर मशीन लेने के लिए आवेदन करता है, तो उसे बिहार सरकार मशीन की खरीद पर 75 प्रतिशत तक की सब्सिडी या अधिकतम 1,10,000 रुपये प्रदान करेगी। इसके साथ ही यदि बिहार का एससी-एसटी, ओबीसी और अन्य वर्ग का किसान रोटरी हार्वेस्टर मशीन खरीदना चाहता है, तो आवेदन करने के बाद सरकार उसे रोटरी मल्चर पर 80 प्रतिशत तक सब्सिडी और रूपये में अधिकतम 1,20,000 रुपये की सब्सिडी प्रदान करेगी।

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रोटरी हार्वेस्टर मशीन पर सब्सिडी प्राप्त करने के लिए ऐसे करें आवेदन

बिहार सरकार के आदेश के अनुसार रोटरी हार्वेस्टर मशीन पर सब्सिडी प्राप्त करने के लिए किसान को बिहार का निवासी होना जरूरी है। साथ ही उसके पास कृषि योग्य भूमि भी होनी चाहिए। ऐसे किसान जो रोटरी हार्वेस्टर मशीन पर सब्सिडी प्राप्त चाहते हैं, वो बिहार कृषि विभाग के पोर्टल https://dbtagriculture.bihar.gov.in/ पर जाकर अपना ऑनलाइन आवेदन भर सकते हैं। किसानों को ऑनलाइन आवेदन भरते समय आधार कार्ड, पैन कार्ड, जमीन के कागजात, पासपोर्ट साइज फोटो, बैंक खाता संख्या और मोबाइल नंबर अपने साथ रखना चाहिए। इनकी डीटेल आवेदन भरते समय किसान से मांगी जाएगी। इसके अलावा यदि किसान कृषि यंत्रों से संबंधित किसी भी प्रकार की अन्य जानकारी प्राप्त करना चाहते हैं, तो वो कृषि विभाग के हेल्पलाइन नंबर 18003456214 पर भी संपर्क कर सकते हैं।

क्या होते हैं प्रधानमंत्री किसान समृद्धि केंद्र? जानिए इनके बारे में

क्या होते हैं प्रधानमंत्री किसान समृद्धि केंद्र? जानिए इनके बारे में

भारत में किसानों के लिए खेती करने के लिए बहुत सारी परेशानियां हैं, जिसके कारण भारत के किसान अपनी क्षमता के हिसाब से खेतों से पर्याप्त उपज प्राप्त नहीं कर पाते हैं। 

कई बार उन्हें अपनी उपज को बढ़ाने के लिए उर्वरक, सॉइल और उन्नत बीजों की जरूरत होती हैं। लेकिन किसानों को ये चीजें समय पर नहीं मिल पाती हैं, और कई बार मिलती भी हैं तो उनकी गुणवत्ता बेहद घटिया होती है। 

जिसके कारण किसान भाई फर्जी दुकानदारों के द्वारा छले जाते हैं। इन परेशानियों का निवारण करने के लिए केंद्र सरकार ने प्रधानमंत्री किसान समृद्धि केंद्र बनाने की घोषणा की है।

क्या है प्रधानमंत्री किसान समृद्धि केंद्र

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश भर में प्रधानमंत्री किसान समृद्धि केंद्र बनाने की घोषणा की है। इन केंद्रों पर किसानों की सहूलित के लिए हर चीज उपलब्ध होगी। 

उदाहरण के लिए इन केंद्रों पर वन नेशन वन फर्टिलाइजर स्कीम के तहत उर्वरक, खाद, बीज कीटनाशक के साथ कई तरह की कृषि मशीनरी भी उपलब्ध कारवाई जाएगी। 

साथ ही, इन केंद्रों पर किसान भाई कृषि मशीनरी किराये पर भी ले सकेंगे। कृषि मंत्रालय के अधिकारियों ने बताया है, कि इन केंद्रों पर किसान भाई अपने खेत की मिट्टी की जांच भी करवा सकेंगे। 

साथ ही बुवाई का सीजन शुरू होने के पहले इन केंद्रों के माध्यम से किसान भाइयों के लिए 15 दिन का जागरुकता अभियान भी चलाया जाएगा। जिसमें शामिल होकर किसान भाई खेती बाड़ी से संबंधित नई तकनीकों के बारे में जानकारी हासिल कर सकेंगे। 

इसके साथ ही इन प्रधानमंत्री किसान समृद्धि केंद्रों को कृषि उपज मंडी के आस पास बनाया जाएगा, ताकि किसान भाई आसानी से इन केंद्रों तक पहुंच सकें।

सरकार का प्रधानमंत्री किसान समृद्धि केंद्र खोलने की उद्देश्य क्या है?

सरकार द्वारा इन केंद्रों को खोलने का उद्देश्य किसानों के बीच खेती बाड़ी को लेकर जागरुकता फैलाना है। ताकि किसान भाई खेती में नई तकनीक का इस्तेमाल करके ज्यादा से ज्यादा उत्पादन प्राप्त कर सकें। 

इसके साथ ही सरकार इन केंद्रों के माध्यम से किसानों को खेती संबंधी मशीनरी, बीज आदि को अच्छी दरों पर उपलब्ध कराना चाह रही है। इन केंद्रों पर किसानों की सभी समस्याएं एक ही छत के नीचे सुलझ जाएंगी। 

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ब इन केंद्रों के माध्यम से सरकार किसानों तक बेहद आसानी से फर्टिलाइजर पहुंचा सकेगी। क्योंकि अभी तक मौजूदा व्यवस्था में निर्माता कंपनियां फर्टिलाइजर की दुकानों पर डीलर के माध्यम से फर्टिलाइजर पहुंचाती थीं। 

लेकिन अब डीलर कंपनियां प्रधानमंत्री किसान समृद्धि केंद्र में सीधे फर्टिलाइजर पहुंचा सकेंगी। इससे किसानों तक खाद वितरण में आसानी होगी। पीएम नरेंद्र मोदी ने दिल्ली में आयोजित किसान मेला में 600 पीएम किसान समृद्धि केंद्रों का उद्घाटन किया है। 

साथ ही, घोषणा की है, कि आने वाले दिनों में देश में 330499 खुदरा खाद दुकानों को किसान समृद्धि केंद्रों में बदल दिया जाएगा। जहां किसानों को खाद, बीज, उपकरण, मिट्टी की टेस्टिंग और खेती से जुड़ी सभी जानकारी बेहद आसानी से हासिल हो सकेगी। 

साथ ही पीएम नरेंद्र मोदी ने बताया था, कि किसानों को कृषि उपज बढ़ाने के लिए कृषि सेवा केंद्र और कृषि विज्ञान केंद्र व एग्रीकल्चर यूनिवर्सिटी की ओर से भी जागरूक किया जाएगा। यह जागरुकता अभियान किसान समृद्धि केंद्रों के माध्यम से चलाया जाएगा।

ये किसान उठा सकते हैं इस केंद्र का लाभ

कृषि मंत्रालय के अधिकारियों ने बताया है, कि ये केंद्र देश के किसानों के लिए खोले गए हैं। इसलिए इन केंद्रों पर जाकर हर किसान इस योजना का लाभ ले सकते हैं। 

कोई भी किसान अपने खेत की मिट्टी की जांच करवा सकता है और यहां से खाद, बीज, दवाई और उर्वरक ले सकता है। इन केंद्रों के खुल जानें से किसानों को इधर उधर भटकने की जरूरत नहीं पड़ेगी। 

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इन केंद्रों पर दुर्घटना बीमा का भी मिलेगा लाभ

सरकार ने बताया है, कि इन केंद्रों पर आने वाले किसानों को अब दुर्घटना बीमा का भी लाभ मिलेगा। फिलहाल इफको की तरफ से खाद-उर्वरक की बोरी पर 4,000 रुपये का दुर्घटना बीमा दिया जाता है। 

सरकार ने बताया है, कि दुर्घटना बीमा का लाभ लेने के लिए ग्राहक को खाद खरीदने के बाद पॉक्स मशीन से पक्का बिल लेना होता है। इसके अतिरिक्त कृषि-किसान से जुड़ी दुर्घटनाओं पर एक लाख तक का बीमा कवर दिया जाता है। 

यह दुर्घटना बीमा प्रधानमंत्री किसान समृद्धि केंद्र के माध्यम से किसान भाई बेहद आसानी से प्राप्त कर सकते हैं। बताया जा रहा है कि भविष्य में इन केंद्रों के माध्यम से ड्रोन की सुविधा भी किसानों के लिए उपलब्ध कारवाई जाएगी। 

यह सुविधा पूर्णतः फ्री होगी, ड्रोन के माध्यम से खेती करने पर किसान भाई अपने समय के साथ-साथ धन की बचत भी कर पाएंगे।

KITS वारंगल ने विकसित किया स्वचालित ट्रैक्टर, लागत और मेहनत करेगा कम

KITS वारंगल ने विकसित किया स्वचालित ट्रैक्टर, लागत और मेहनत करेगा कम

आज के आधुनिक और मशीनीकरण युग में नित नए अविष्कार हो रहे हैं। सभी क्षेत्रों में अच्छे खासे बदलाव देखने को मिल रहे हैं। इसी कड़ी में KITS वारंगल द्वारा स्वचालित ट्रेक्टर विकसित किया है, जिसका फिलहाल चौथा ट्राइल भी सफलता पूर्वक तरीके से संपन्न हो गया है। बतादें, कि यह ट्रेक्टर लागत प्रभावी है, जो आधुनिक तरीके से किसानों की आमदनी को बढ़ाएगा। आधुनिक तकनीकों एवं मशीनों द्वारा तकरीबन हर क्षेत्र में क्रांति का उद्घोष हो चुका है। महीनों तक विलंबित पड़े कार्य फिलहाल चंद मिनटों में पूर्ण हो जाते हैं। खेती-किसानी के कार्यों को भी सुगम एवं सुविधाजनक करने हेतु बहुत सारे यंत्र, टूल्स एवं वाहन तैयार किए जा रहे हैं। जो कि लागत को प्रभावी होने के साथ-साथ किसानों की आमदनी को दोगुना करने में सहायक हैं। इसी ओर काकतीय इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी एंड साइंस, वारंगल (KITS-W) ने किसानों के लिए एक ड्राइवरलैस ऑटोमैटिक ट्रैक्टर तैयार किया है, जिसका चौथा ट्राइल भी सफलतापूर्ण ढंग से संपन्न हो चुका है।

इस स्वचालित ट्रैक्टर की क्या-क्या विशेषताएं हैं

KITS, वारंगल के कंप्यूटर विज्ञान और इंजीनियरिंग विभाग (CSE) के प्रोफेसर डॉ. पी निरंजन ने बताया है, कि ड्राइवरलैस स्वचालित ट्रैक्टर के लिए 41 लाख रुपये की परियोजना राशि मुहैय्या कराई गई थी। इसी कड़ी में इस ट्रेक्टर की विशेषताओं को लेकर इस प्रोजेक्ट के हैड अन्वेषक एमडी शरफुद्दीन वसीम ने जानकारी दी है, कि यह स्वचालित ट्रैक्टर किसानों को सुविधाजनक तरीके से खेतों की जुताई करने में सहायता करेगा। उन्होंने कहा है, कि यह लागत प्रभावी ट्रेक्टर खेती में किसानों की लागत के साथ-साथ समय की भी बचत होगी। साथ ही, किसानों की आमदनी को अधिक करने में भी सहायक भूमिका निभाएगी। ये भी पढ़े: भारत में लॉन्च हुए ये 7 दमदार नए ट्रैक्टर विशेषज्ञों के कहने के मुताबिक, इस स्वचालित ट्रैक्टर को विकसित करने का प्रमुख लक्ष्य खेती में मानव परिश्रम को कम करना है। इस ट्रैक्टर को बिल्कुल उसी प्रकार डिजाइन किया गया है। किसान भाई एक रिमोट द्वारा नियंत्रित उपकरण से इस ट्रैक्टर का सफल संचालन कर कृषि कार्य कर सकते हैं।

इस तरह संचालित होगा यह ट्रैक्टर

सीएसई के प्रोफेसर निरंजन रेड्डी का कहना है, कि स्वचालित ऑटोमैटिक ट्रेक्टर को कंप्यूटर गेम की भांति ही एक एंड्रॉइड एप्लीकेशन की सहायता से संचालित कर सकते हैं। इस स्वचलित ट्रेक्टर में लाइफ फील्ड से डेटा एकत्रित करने हेतु विशेषज्ञों ने सेंसर भी स्थापित किए हैं, जो कि किसी जगह विशेष पर कार्य करने हेतु तापमान एवं मृदा की नमी का भी पता करने में सहायता करेंगे। इससे मृदा की खामियों के विषय में भी जाँच करके डेटा एकत्रित करने में भी सुगमता रहेगी।
इस राज्य में किसानों को निःशुल्क पौधे, 50 हजार रुपये की अनुदानित राशि भी प्रदान की जाएगी

इस राज्य में किसानों को निःशुल्क पौधे, 50 हजार रुपये की अनुदानित राशि भी प्रदान की जाएगी

बिहार सरकार बागवानी को प्रोत्साहन दे रही है। कृषकों को बागवानी क्षेत्र से जोड़ने के लिए सब्सिडी दी जा रही है। उनको शर्ताें के मुताबिक फ्री पौधे, आर्थिक तौर पर सहायता भी की जा रही है। भारत के कृषक अधिकांश बागवानी पर आश्रित रहते हैं। बतादें कि देश के राजस्थान, उत्तर प्रदेश, मध्यप्रदेश, बिहार सहित समस्त राज्यों में बागवानी की जाती है। किसान लाखों रुपए की आमदनी कर लेते हैं। साथ ही, राज्य सरकारों के स्तर पर कृषकों को काफी सहायता दी जाती है। इसी कड़ी में बिहार सरकार की तरफ से एक अहम कवायद की गई है। राज्य सरकार से कृषकों को बागवानी हेतु नि:शुल्क पौधे मुहैय्या किए जाऐंगे। साथ ही, उनको मोटा अनुदान भी प्रदान किया जाएगा। राज्य सरकार की इस योजना से किसान काफी खुश नजर आ रहे हैं।

इस प्रकार किसानों को निःशुल्क पौधे दिए जाऐंगे

बिहार सरकार के अधिकारियों के मुताबिक, नालंदा जनपद में निजी जमीन पर 15 हेक्टेयर में आम का बगीचा लगाता है, तो उसको निःशुल्क पौधे दिए जाएंगे। सघन बागवानी मिशन के अंतर्गत 10 हेक्टेयर जमीन में आम का बगीचा लगाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। एक किसान 8 कट्ठा साथ ही ज्यादा से ज्यादा एक हेक्टेयर में पौधे लगा सकते हैं। 5 हेक्टेयर में अमरूद और 5 हेक्टेयर में केला और बाग लगाने वाले किसानोें को भी सब्सिड़ी प्रदान की जाएगी। ये भी पढ़े: बागवानी के साथ-साथ फूड प्रोसेसिंग यूनिट लगाकर हर किसान कर सकता है अपनी कमाई दोगुनी

योजना का लाभ पहले आओ-पहले पाओ के आधार पर मिलेगा

किसान भाई इसका फायदा उठाने के लिए ऑनलाइन माध्यम से आवेदन किया जा सकता है। इसमें पहले आओ-पहले पाओ के आधार पर चुनाव होगा। मतलब योजना के अंतर्गत जो पहले आवेदन करेगा। उसे ही योजना का फायदा मिल सकेगा। द्यान विभाग के पोर्टल (horticulture.bihar.gov.in) पर ऑनलाइन आवेदन कर आप योजना का फायदा उठा सकते हैं।

धनराशि इस प्रकार से खर्च की जाएगी

बिहार सरकार के मुताबिक, 50 फीसद अनुदान के उपरांत प्रति हेक्टेयर 50,000 रुपये के प्रोजेक्ट पर तीन किस्तों में धनराशि व्यय की जानी है। प्रथम वर्ष में 60 प्रतिशत तक धनराशि प्रदान की जाएगी। जो कि 30,000 रुपये तक होगी। एक हेक्टेयर में लगाए जाने वाले 400 पौधों का मूल्य 29,000 रुपये होगा। शेष धनराशि कृषकों के खाते में हस्तांतरित की जाएगी। द्वितीय वर्ष में 10 हजार, तीसरे वर्ष में भी 10 हजार रुपये का ही अनुदान मिलेगा। हालांकि, इस दौरान पौधों का ठीक रहना काफी जरूरी है। मुख्यमंत्री बागवानी मिशन के अंतर्गत 5 हेक्टेयर में आम का बाग लगाया जाना है। प्रति हेक्टेयर 100 पौधों पर 18 हजार रुपये खर्च किए जाऐंगे। आम की किस्मों में मल्लिका, बंबइया, मालदाह, गुलाब खास, आम्रपाली शम्मिलित हैं।
मध्य प्रदेश सरकार द्वारा कृषकों को कस्टम हायरिंग सेंटरों के जरिए किराये पर उपलब्ध कराई जा रही मशीनें

मध्य प्रदेश सरकार द्वारा कृषकों को कस्टम हायरिंग सेंटरों के जरिए किराये पर उपलब्ध कराई जा रही मशीनें

किसान भाई कस्टम हायर‍िंग सेंटरों से मशीन क‍िराये पर लेकर खेती का कार्य सुगमता से कर सकते हैं। यदि आप सेंटर खोलने के ल‍िए इच्छुक हैं, तो आपको स्नातक की डिग्री चाहिए। सरकार 10 लाख रुपये तक की सब्स‍िडी प्रदान करेगी। एक सेंटर निर्मित करने के ल‍िए 25 लाख रुपये के निवेश की आवश्यकता पड़ेगी। मध्य प्रदेश सरकार का कहना है, क‍ि फसलों की उत्पादकता एवं क‍िसानों का मुनाफा बढ़ाने के ल‍िए कृषि क्षेत्र में मशीनों के उपयोग को प्रोत्साहन देना होगा। यह एक गलत धारणा है, कि मशीनीकरण से रोजगार के अवसरों में कोई गिरावट आती है। दरअसल, सच तो यह है क‍ि इससे रोजगार की नवीन संभावनाएं बनती हैं। राज्य में इस वक्त 3800 कस्टम हायरिंग केंद्र (CHC) मतलब मशीन बैंक कार्य कर रहे हैं, ज‍िन राज्यों में क‍िसान मशीनों का अधिक उपयोग करते हैं, वो खेती में काफी आगे हैं। इसके ल‍िए पंजाब एवं हर‍ियाणा को उदाहरण के तौर पर देखा जा सकता है। मध्य प्रदेश भी इस द‍िशा में आगे बढ़ने के प्रयास में जुटा हुआ है। इसकी तस्दीक यहां पर होने वाली ट्रैक्टर ब‍िक्री से की जा सकती है।

किसानों ने विगत पांच वर्षों में 1 लाख 23 हजार ट्रैक्टर खरीदें हैं

राज्य सरकार ने दावा किया है, क‍ि मध्य प्रदेश के किसानों ने 2018-19 से अब तक बीते पांच साल में 1 लाख 23 हजार ट्रैक्टर खरीदे हैं। ट्रैक्टर की ब‍िक्री कृष‍ि व‍िकास की न‍िशानी मानी जाती है। कस्टमर हायर‍िंग सेंटर
सहकारी समितियां, स्वयं सहायता समूह एवं ग्रामीण उद्यम‍ियों द्वारा संचालित किया जाता है। जिससे कि लघु एवं मध्यम कृषकों को कृषि यंत्रों की सुविधा सुगमता से मिल जाए। यहां पर 2012 में कस्टम हायरिंग सेंटर निर्माण की पहल की गई थी। ये भी पढ़े: सोनालिका ट्रैक्टर की बिक्री में 35.5% फीसदी की वृद्धि

किसान भाइयों को मशीन बैंक का फायदा कैसे मिलता है

कस्टम हायरिंग सेंटर इस उद्देश्य के साथ स्थापित किए गए हैं, कि वे 10 किलोमीटर के आस-पास के दायरे में लगभग 300 किसानों को सेवाएं दे सकें। इसके माध्यम से क‍िसान अपनी आवश्यकता की मशीनों को क‍िराये पर लेकर कृषि कार्य कर सकते हैं। इन केंद्रों की सेवाओं को अधिक फायदेमंद बनाने के लिए संख्या को सीमित रखा गया है। संपूर्ण राज्य में केवल 3800 मशीन बैंक कार्य कर रहे हैं। कस्टम हायरिंग सेंटर से लघु व सीमांत किसानों को किराये पर मशीन उपलब्ध कराई जाती है, जिसके लिए भारी पूंजी निवेश की जरूरत होती है। राज्य सरकार 40.00 लाख से लेकर 2.50 करोड़ तक की कीमत वाली नवीन और आधुनिक कृषि मशीनों के लिए हाई-टेक हब तैयार कर रही है। अब तक 85 गन्ना हार्वेस्टर्स के हब निर्मित हो गए हैं। यह जानकारी मध्य प्रदेश के कृषि अभियांत्रिकी संचालक राजीव चौधरी द्वारा साझा की गई है।

प्रदेश के युवाओं के ल‍िए रोजगार के अवसर प्रदान किए जा रहे हैं

किसानों को कस्टम हायरिंग सेंटर का फायदा देने एवं किराये पर उपलब्ध कृषि मशीनों के संबंध में जागरूक करने के लिए एक अभ‍ियान जारी क‍िया गया है। कस्टम हायरिंग सेंटर पर किसानों के ज्ञान एवं कौशल में सुधार करने के लिए प्रशिक्षण एवं कार्यशालाएं आयोजित की जा रही हैं। कौशल विकास केंद्र भोपाल, जबलपुर, सतना, सागर, ग्वालियर, इंदौर, भोपाल, जबलपुर और सतना में ऐसा कार्यक्रम चल रहा है। इनमें ट्रैक्टर मैकेनिक एवं कंम्बाइन हार्वेस्टर ऑपरेटर कोर्स आयोजित किए जा रहे हैं। अब तक 4800 ग्रामीण युवाओं को प्रशिक्षित क‍िया जा चुका है। ये भी पढ़े: खरीफ की फसल की कटाई के लिए खरीदें ट्रैक्टर कंबाइन हार्वेस्टर, यहां मिल रही है 40 प्रतिशत तक सब्सिडी

युवा किसान किस प्रकार मशीन बैंक खोल सकते हैं

ग्रामीण युवा स्नातक की डिग्री के साथ इस योजना का फायदा ले सकते हैं। इसमें समकुल 25 लाख रुपये के निवेश की आवश्यकता होती है। युवाओं को 5 लाख रुपये की मार्जिन धनराशि देनी पड़ती है। सरकार समकुल लागत का 40 प्रतिशत अनुदान देती है, जो अधिकतम 10 लाख तक होती है। अतिरिक्त लागत बैंक लोन से कवर हो जाती है। किसानों के हित में केंद्र व राज्य सरकारें अपने-अपने स्तर से योजनाएं चलाती हैं।
कृषि यंत्रों की खरीदी पर सरकार देगी 50% से 80% अनुदान, जानें इसकी आवेदन प्रक्रिया के बारे में

कृषि यंत्रों की खरीदी पर सरकार देगी 50% से 80% अनुदान, जानें इसकी आवेदन प्रक्रिया के बारे में

सरकार समय समय पर किसानों के लिए नयी योजना लेकर आती रहती है। किसानों की आर्थिक स्थिति मजबूत करने की दिशा में सरकार निरंतर प्रयाश कर रही है। अब हरियाणा सरकार प्रदेश के किसानों के लिए नई योजना लेकर आयी है। हरियाणा सरकार ने राज्य के किसानों को कृषि उपकरण खरीदने पर व्यक्तिगत श्रेणी में 50% अनुदान देने की घोषणा की है, जबकि सहकारी समिति एफपीओ और पंचायतों ने किसानों के लिए कस्टम हायरिंग केंद्र बनाने पर 80% अनुदान दिया है। इस योजना को सरकार ने खेती में आधुनिक उपकरणों का उपयोग करने के लिए शुरू किया है। किसानों को इस योजना का लाभ मिलेगा, जिससे उनकी आय में वृद्धि होगी, क्योंकि वे नवीनतम उपकरणों को आसानी से खरीद सकेंगे। आज यहां आप इस योजना से जुड़ी सम्पूर्ण जानकारी के बारे में विस्तार से जानेंगे

हरियाणा कृषि यंत्र अनुदान योजना के लाभ एवं विशेषताएं

सरकार हरियाणा राज्य के किसानों को इस योजना के तहत कृषि उपकरण खरीदने पर सब्सिडी देगी। इस योजना के अंतर्गत किसानों को 50 प्रतिशत से 80 प्रतिशत की अनुदान राशि मिलेगी। किसानों को आधुनिक कृषि उपकरणों से लाभ मिलेगा। राज्य के किसानों की आर्थिक हालत भी सुधरेगी। राज्य के किसानों को आधुनिक कृषि उपकरणों का उपयोग करने से उत्पादन में भी वृद्धि होगी।

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हरियाणा कृषि अनुदान योजना के लिए पात्रता एवं आवश्यक दस्तावेज  

योजना में आवेदन करने वाले किसान हरियाणा के स्थायी निवासी होने चाहिए। आवेदन करने वाले किसान के पास कृषि योग्य भूमि होनी बहुत आवश्यक है। साथ ही, इसके लिए किसान भाइयों के पास पैन कार्ड, बैंक पासबुक, परिवार पहचान पत्र, शपथ पत्र, पटवारी रिपोर्ट, मोबाइल नंबर, ट्रैक्टर आरसी जैसे महत्वपूर्ण दस्तावेजों का होना अनिवार्य है। 

हरियाणा कृषि यंत्र अनुदान योजना के तहत किन यंत्रो पर मिलेगी सब्सिड़ी 

हरियाणा कृषि यंत्र अनुदान योजना के अंतर्गत हरियाणा सरकार विभिन्न कृषि यंत्रो पर अनुदान देने का ऐलान किया है। इस योजना के तहत मिलने वाले यंत्रो की सूची में स्ट्रॉ बेलर, राइस ड्रायर, फर्टिलाइजर ब्रॉडकास्ट, लेजर लैंड लेवलर, ट्रैक्टर ड्रिवन स्प्रे, पैडी ट्रांसप्लांटर, है रेक, मोबाइल श्रेडर।, रोटावेटर, रीपर बाइंडर, ट्रैक्टर ड्राइविंग पाउडर वीडर आदि यंत्र सम्मिलित हैं। 

हरियाणा कृषि यंत्र अनुदान योजना के लिए आवेदन प्रक्रिया  

इस योजना का लाभ लेने के लिए पात्र किसानों को आवेदन करना होगा, हरियाणा कृषि यंत्र अनुदान योजना में आवेदन करने के लिए सबसे पहले आपको आधिकारिक वेबसाइट agriharyana.gov.in पर जाना होगा। इसके बाद आपके सामने होम पेज खुलेगा,होम पेज पर आपको Farmers Corner वाले ऑप्शन पर क्लिक करके Apply For Agriculture Schemes के ऑप्शन पर क्लिक कर देना है। 

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इसके बाद आपके सामने एग्रीकल्चर की सभी स्कीम्स जाएगी। इसमें आपको हरियाणा कृषि यंत्र सब्सिडी योजना पर क्लिक कर देना है। जैसे ही आप अपनी स्कीम के सामने View वाले का ऑप्शन पर क्लिक करेंगे आपके सामने एक नया पेज खुलेगा। इसमें आपको हेयर टू Register के ऑप्शन पर क्लिक करना होगा। अब आपको पूछी गई जानकारी भरनी है।  अब आवश्यक दस्तावेजों को अपलोड करना होगा। हरियाणा कृषि यंत्र अनुदान योजना के लिए ऑनलाइन आवेदन करने के लिए आपको फॉर्म सबमिट करना होगा ,पूरी जानकारी सही-सही देना होगा। इस प्रक्रिया को को पूरा करने के बाद आपका आवेदन हो संपन्न हो जाऐगा।